Celebrate “Disability Awareness Day” DAD-PRESS RELEASE

PRESS RELEASE

जयपुर, 15 जुलाई। डिसेबल बच्चों में भी एबिलिटी होती है, इसलिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। समाज के धनवान लोग अपनी कमाई में से कुछ राशि डिसेबल बच्चों के लिए निकालें ताकि उन्हें अच्छि सुविधाएं मिल सके, अच्छी तालीम मिल सके और उनकी प्रतिभा का विकास हो सके। यह कहना है पूर्व न्यायाधिपति और राज्यपाल अंशुमन सिंह का।
सिंह रविवार को डिसेबिलिटी अवेयरनेस डे (नि:शक्तजन जागृति दिवस) पर स्वयं सेवी संगठन ‘मैसेज संस्था’ और हरीशचंद्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ओटीएस स्थित भगवत सिंह मेहता सभागार में आयोजित समारोह में बोल रहे थे। सिंह ने कहा कि अभी तक नि:शक्तजनों को समाज में हेय दृष्टी से देखा जाता रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि समाज उन्हें बराबरी का स्थान दे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल रहते हुए मैनें राजस्थान में डिसएबल लोगों के लिए होने वाले कामों को करीब से देखा है और मैं चाहता हूं कि मैसेज संस्था डिसएबल लोगों के उत्थान के काम को राज्य के गांव-गांव तक लेकर जाए। मैसेज ने जनसमस्याओं के प्रति अवेयरनेस जगाने के लिए जो काम किए हैं, वह भी सराहनीय है।

नि:शक्त बच्चों की खुशी के लिए हम कुछ भी करेंगे
समारोह में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक रविन्द्र तोमर ने कहा कि नि:शक्त बच्चों के लिए स्वयंसेवी संस्थाएं जिस तरह का काम कर रही है, वैसा काम हम भी नहीं कर सकते। एक दृष्टिहीन बच्चे के दमदार गायन से प्रभावित होकर तोमर ने घोषणा की कि स्वयं सेवी संस्थाओं को नि:शक्त बच्चों के प्रोग्रामों के लिए हमारी किसी भी मदद की दरकार होगी तो हम करेंगे। उन्होंने नि:शक्त बच्चों को उनकी लाइन में आने, प्रोग्राम करने और पुलिसबल से संवाद कायम करें।

सरकार बनाए नि:शक्तजन आयोग
राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मानद अध्यक्ष डॉ. केएल जैन ने कहा कि आज नि:शक्तजन जागृति दिवस है और आज यह आवाज सरकार के पास जानी चाहिए कि वह जल्द से जल्द नि:शक्तजन आयोग का गठन करे, ताकि उनकी समस्याओं का निदान हो सके। उन्होंने कहा कि नि:शक्तों को नि:शक्त कहना, उनको मिले अभिषाप की पुनरावृत्ति है, इस लिए अब जरूरत है कि उन्हें इस नाम से नहीं पुकारा जाए, अगर हम उन्हें त्रिनेत्र कहें तो ज्यादा उपयुक्त होगा, क्योंकि जिस किसी में भी शारीरिक विकृति होती है, उनमें आम आदमी के मुकाबले एक खूबी ज्यादा होती है।

सम्पन्न लोग वंचितों के लिए काम करे
राजस्थान बिल्डर्स एसोसिएशन के संरक्षक गोपाल गुप्ता ने कहा कि समाज में एक वर्ग पूर्ण साधन सम्पन्न है, तो दूसरा वंचित है। साधन सम्पन्न वर्ग के लेागों को अपने धन में से कुछ राशि वंचितों के लिए भी खर्च करनी चाहिए क्योंकि लक्ष्मी का ठहराव विनाश का कारण बनता है अत: वे अपने संचित धन में से कुछ राशि वंचितों की भलाई के लिए खर्च करें।
मैसेज के समन्वयक गोपीवल्लभ तिवाड़ी ने बताया कि समारोह की शुरूआत में दृष्टिहीन बालक सुनील शर्मा ने गीत प्रस्तुत किया। बाद में प्रयास संस्था के बच्चों ने लघुनाटक प्रस्तुत करके उन कारणों पर प्रकाश डाला, जिनकी वजह से डिसएबल बच्चे पैदा होते हैं। समारोह के मुख्यअतिथि पूर्व न्यायाधिपति अंशुमन सिंह ने मीनाक्षी मल्होत्रा, सुनील कुमार चौधरी, कुलदीप जैमन, फाजिल खान, अम्बालाल, किशनलाल, साधना मलिक सिंह को सम्मानित किया। विशिष्ठ अतिथि रविन्द्र तोमर, गोपाल गुप्ता, केएल जैन ने समाज सेवियों गोकुल प्रसाद पारीक, रवि कामरा, पंचशील जैन और डॉ. सतीश त्यागी को भी सम्मानित किया।

सम्मनित होने वाले बच्चों का विस्तृत ब्यौरा
सुनील कुमार चौधरी-पूर्ण दृष्ठिहीन होने के बावजूद सेकण्डरी परीक्षा में 94.17 प्रतिशत अंकों के साथ राजस्थान में मेरिट लिस्ट में 14 स्थान
मीनाक्षी मलहोत्रा-अलवर निवासी, पूर्ण दृष्टिहीन 12वीं सीबीएसई परीक्षा में 90 प्रतिशत अंकों के साथ बी कैटेगरी में टॉप किया।
कुलदीप जैमन-एलएलबी फर्स्ट ईयर,शतरंज चैम्पियन,पीलूमोदी चैम्पियनशिप विजेता नेशनल अंडर 19 में सलेक्शन। इनकी खासबात कि ये सामान्य कैटेगरीज में खेलते हैं और बिना किसी रियायत के कठिन मेहनत और अभ्यास से शह और मात के इस खेल में भी चुनौतियों को परास्त किया।
फजिल खान-12वीं राजस्थान बोर्ड में 79 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण,समाज और परिवार के उम्मीदों का चिराग।
अम्बालाल-इंटरनेशनल एथलीट
किशनलाल-एथलीट
साधना मलिक सिंह-पैरा ऑलंपिक 2012 में एथलेटिक प्रतियोगिता की विजेता।

 

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